कटनी जिले में खनिज संपदा जितनी समृद्ध है, उतने ही गंभीर सवाल यहां खनन व्यवस्था पर भी उठते रहे हैं। ताजा मामला विजयराघवगढ़ विधानसभा क्षेत्र के ग्राम कन्नौर का है, जहां सरकारी भूमि पर लीज समाप्त होने के बावजूद कथित तौर पर क्रेशर प्लांट का संचालन जारी है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन पर नियमों की अनदेखी और संरक्षण देने के आरोप लगाए हैं।
जानकारी के अनुसार बरही तहसील के ग्राम कन्नौर स्थित खसरा नंबर 861 की करीब 0.65 हेक्टेयर शासकीय भूमि, जो राजस्व रिकॉर्ड में कच्चे सार्वजनिक मार्ग के रूप में दर्ज है, पूर्व में ग्रामीणों के आवागमन के लिए उपयोग में लाई जाती थी। आरोप है कि खलवारा बाजार कैमोर निवासी तिलकराज ग्रोवर को तत्कालीन कलेक्टर द्वारा निर्धारित अवधि के लिए इस भूमि की लीज स्वीकृत की गई थी। लीज की शर्तों में स्पष्ट उल्लेख था कि भूमि पर किसी भी प्रकार का स्थायी निर्माण नहीं किया जाएगा, लेकिन इसके बावजूद वहां क्रेशर प्लांट स्थापित कर दिया गया।
बताया जा रहा है कि उक्त लीज 22 जुलाई 2025 को समाप्त हो चुकी है, लेकिन इसके बाद भी क्रेशर प्लांट का संचालन जारी है। प्लांट और वहां रखे गए खनिज स्टॉक के कारण ग्रामीणों का वर्षों पुराना सार्वजनिक मार्ग भी कथित रूप से अवरुद्ध हो गया है।स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि क्रेशर प्लांट के संचालन के लिए आवश्यक विभागीय अनुमतियां, यहां तक कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की एनओसी भी प्राप्त नहीं की गई।सार्वजनिक मार्ग बंद होने से परेशान ग्रामीणों ने इस मामले को लेकर उच्च न्यायालय में जनहित याचिका भी दायर की है, जिस पर सुनवाई लंबित है। ग्रामीणों का कहना है कि न्यायालय में मामला पहुंचने के बाद प्रशासन हरकत में जरूर आया, लेकिन अब तक प्लांट बंद कराने या उसे अन्यत्र स्थानांतरित करने जैसी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
वही इस मामले में कटनी कलेक्टर आशीष तिवारी ने बताया कि बरही तहसील के ग्राम कन्नौर स्थित खसरा नंबर 861 की करीब 0.65 हेक्टेयर शासकीय भूमि, जो राजस्व रिकॉर्ड में कच्चे सार्वजनिक मार्ग के रूप में दर्ज है, पूर्व में ग्रामीणों के आवागमन के लिए उपयोग में लाई जाती थी। जिस क्रेशर की लीज समाप्त हो गई थी जिसे रीनू कर ली गई है। वही जो राजस्व रिकॉर्ड में कच्चे सार्वजनिक मार्ग के रूप में दर्ज है उसे खाली करने के लिए नोटिस दिया गया है। और बहुत जल्द ही उसे हटा दिया जाएगा। अब सवाल यह है कि जब लीज की अवधि समाप्त हो चुकी है और सार्वजनिक मार्ग प्रभावित होने के आरोप हैं, तो आखिर प्रशासन की कार्रवाई कब होगी? यह मामला सरकारी भूमि के उपयोग, प्रशासनिक जवाबदेही और खनन व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह नियमों के पालन और प्रशासनिक निगरानी पर भी बड़ा प्रश्नचिह्न है।



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