कटनी जिले में इन दिनों मेसर्स केपी अवस्थी फर्म से जुड़ा 16 साल पुराना मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। इस प्रकरण को लेकर तरह-तरह के दावे और आरोप सामने आ रहे हैं। फर्म के संचालक केशव प्रसाद अवस्थी ने एक बार फिर सभी आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि यह उनके व्यावसायिक प्रतिद्वंद्वियों और विरोधियों की सोची-समझी साजिश है। उन्होंने पूरे मामले पर अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कई अहम तथ्य भी सामने रखे।
केशव प्रसाद अवस्थी ने बताया कि उनकी फर्म को वर्ष 2013 में तत्कालीन कटनी कलेक्टर द्वारा जारी लगभग 7 करोड़ 31 लाख 56 हजार 160 रुपये की वसूली संबंधी आदेश के खिलाफ उच्च न्यायालय की डबल बेंच से राहत मिल चुकी है।उन्होंने कहा कि 1 अगस्त 2016 को उच्च न्यायालय ने वसूली आदेश को निरस्त कर दिया था, जिससे उनकी फर्म को पूरी राहत प्राप्त हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2016 में समाप्त हो चुके इस प्रकरण को अब ईओडब्ल्यू के एक अलग मामले से जोड़कर भ्रम फैलाने की कोशिश की जा रही है। अवस्थी के अनुसार, 21 दिसंबर 2023 को उच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति अनुराधा शुक्ला द्वारा ईओडब्ल्यू मामले में पूर्व में मिली अंतरिम राहत यानी स्टे को निरस्त किया गया, जबकि 7.31 करोड़ रुपये की वसूली वाला मामला उससे अलग है और वह पहले ही वर्ष 2016 में समाप्त हो चुका है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि स्टे हटने के बाद किसी न्यायालय में सुनवाई दोबारा शुरू हुई भी है, तो मामला अभी न्यायालय में विचाराधीन है। ऐसे में अंतिम निर्णय आने से पहले संबंधित विभाग किसी भी प्रकार की दंडात्मक या वसूली संबंधी कार्रवाई नहीं कर सकता। वही जब कटनी जिले के माइनिंग विभाग के अधिकारी रत्नेश दीक्षित से बात की गई तो उनका कहना था कि माइनिंग विभाग से जो नोटिस दिया गया था उस मामले में जांच कराई जा रही है। और यह पूरा मामला न्यायलय में चल रहा है और न्यायालय के आदेश के बाद भी इस मामले में कुछ कहा जा सकता है।

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