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सुनवाई से गायब आम जन,खासों के नतमस्तक गंगा खनिज कंपनी।अर्जुनी कोल ब्लॉक की जनसुनवाई पर उठे सवाल।

सुनवाई से गायब आम जन,खासों के नतमस्तक गंगा खनिज कंपनी।अर्जुनी कोल ब्लॉक की जनसुनवाई पर उठे सवाल।

The Common Man Absent from the Hearing; Ganga Mineral Company Bows Down to the Elite. Questions Raised Over the Public Hearing for the Arjuni Coal Block.



ग्रामीणों ने लगाया गंगा खनिज कंपनी और पर्यावरण विभाग पर मिलीभगत का आरोप

उमरिया।जिले के पाली विकासखंड अंतर्गत ग्राम अर्जुनी में प्रस्तावित गंगा खनिज प्राइवेट लिमिटेड की कोयला खदान को लेकर आयोजित पर्यावरणीय जनसुनवाई विवादों के घेरे में आ गई है। स्थानीय ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने इस प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए इसे पूरी तरह “प्रायोजित कार्यक्रम” करार दिया है। आरोप है कि पर्यावरण विभाग और कंपनी की मिलीभगत से सुनवाई उस गांव में कराई गई, जिसका प्रस्तावित खदान क्षेत्र से कोई लेना-देना नहीं है। ऐसा इसलिये किया गया ताकि प्रभावित ग्रामीण अपनी आपत्तियां और समस्याएं खुलकर सामने न रख सकें। जानकारी के अनुसार कपनी को ग्राम अर्जुनी में कोल ब्लॉक आवंटित किया गया है, जबकि पर्यावरणीय जनसुनवाई करीब तीन किलोमीटर दूर ग्राम धौरई में आयोजित कराई गई। ग्रामीणों का कहना है कि नियमानुसार जनसुनवाई उसी क्षेत्र में होनी चाहिए थी, जहां खनन कार्य से सीधे तौर पर लोग, वन क्षेत्र और पर्यावरण प्रभावित होने वाले हैं।
कागजी प्रक्रिया पूरी करने की कवायद
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि कार्यक्रम में अर्जुनी के लोगों की बजाय धौरई और अन्य क्षेत्रों से लोगों को लाकर राय ली गई। इस दौरान रोजगार, विस्थापन, पर्यावरणीय नुकसान, वन्यजीवों की सुरक्षा और जल स्रोतों पर प्रभाव जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर प्रभावित ग्रामीण अपना पक्ष ही नहीं रख सके। क्षेत्रवासियों का आरोप है कि क्षेत्र में होने वाली अधिकांश पर्यावरणीय जनसुनवाईयों की सूचनाएं सार्वजनिक रूप से नहीं दी जातीं, बल्कि उन्हें सीमित दायरे मे रखकर केवल कागजी प्रक्रिया पूरी की जाती है। आरोप यह भी है कि इस मामले में जनपद क्षेत्र के एक बड़े निर्वाचित पदाधिकारी की भूमिका संदिग्ध रही है, जिसने कथित तौर पर आर्थिक लाभ लेकर पूरे मामले को प्रभावित किया।

वन और वन्यजीवों पर मंडरा रहा खतरा
उल्लेखनीय है कि पाली जनपद का यह क्षेत्र घने वनों और जैव विविधता के लिए जाना जाता है। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से लगे होने के कारण यहां बाघ, तेंदुआ, भालू, चीतल सहित अनेक दुर्लभ वन्यजीवों का विचरण बना रहता है। पर्यावरणविदों और स्थानीय लोगों का कहना है कि बड़े पैमाने पर कोयला खनन शुरू होने से जंगल, जल स्रोत और वन्यजीव गंभीर संकट मे पड़ सकते हैं। इसी वजह से क्षेत्र में प्रस्तावित खनन परियोजनाओं का लगातार विरोध हो रहा है।
भाषणो तक सीमित रोजगार के दावे
जिला पंचायत सदस्य हेमनाथ बैगा ने भी जनसुनवाई प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि निजी कंपनियां स्थानीय युवाओं को रोजगार देने के बड़े-बड़े दावे करती हैं, लेकिन वास्तविकता इससे अलग है। उन्होंने कहा कि निजी कोयला कंपनियों का संचालन शहडोल के होटलों के कमरों से किया जा रहा है, जबकि एसईसीएल जैसी सरकारी कंपनियां क्षेत्र में बड़े कार्यालय और स्थायी ढांचा स्थापित कर हजारों लोगों को रोजगार उपलब्ध कराती हैं। श्री बैगा ने बताया कि उन्होंने जनसुनवाई स्थल पहुंचकर प्रशासन को ज्ञापन सौंपा था, जिसमें रोजगार, पर्यावरण संरक्षण और वन्यजीव सुरक्षा को लेकर नीति सार्वजनिक करने की मांग की गई है। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि गंगा खनिज प्राइवेट लिमिटेड की पर्यावरणीय जनसुनवाई दोबारा ग्राम अर्जुनी में आयोजित कराई जाए, ताकि वास्तविक प्रभावित ग्रामीण अपनी बात रख सकें।
(ब्यूरो रिपोर्ट)

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